Archive for June, 2010

नूर

Posted: June 21, 2010 in Poetry, Romance
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It’s been quite long since i wrote the gazal in Hindi, Ek premi ki daastan. So, I thought of writing one more, although it’s more in a song format. But, What the heck! And yes, a hindi song deserved a hindi font, aptly so.

मेरे जाम से छलकता तेरे प्यार का ये नूर है
मुझे तुमसे बेरुखी नहीं थोड़ी बेखुदी ज़रूर है

तुम जो करीब आये मेरे दिल की गिरह से
पलकों में बस गए हो आंसू की तरह से
ठुकरा के जा रहे हो; तुम यूँ मुस्कुरा रहे हो; मैं तरसा हूँ विरह से

मुझे गम का कुछ गिला नहीं तेरी ख़ुशी का सुरूर है

मेरे जाम से छलकता तेरे प्यार का ये नूर है
मुझे तुमसे बेरुखी नहीं थोड़ी बेखुदी ज़रूर है

आँखों ने इश्क ओढ़ लिया, दिल उस परी का गुलाम है
ठोकर मिली कदम कदम, मेरी बेखयाली का इनाम है
बर्बादी की किताबो में; बर्बादों के खिताबो में; मेरा ही जिक्र आम है

मेरी हस्ती गुमनाम सही, मेरा किस्सा मशहूर है

मेरे जाम से छलकता तेरे प्यार का ये नूर है
मुझे तुमसे बेरुखी नहीं थोड़ी बेखुदी ज़रूर है